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हनुमान-जी-व-रावण-का-घूँसा

हनुमान जी व रावण का घूँसा

श्री हनुमान जी के बल का कोई पार नहीं। वे अतिबलशाली और अतिशक्तिशाली है। बड़े बड़े योद्धा भी उनके सामने नहीं टिक सके।
श्री राम व रावन में युद्ध हो रहा था। इसमें हनुमान जी व रावण का एक प्रसंग आता है। युद्ध के दौरान दोनों का आमना-सामना होता है। रावण बड़ा बलवान। उसने हनुमान जी से युद्ध करने के लिए कहा।
रावण हनुमान जी से बोला कि हमारी तुम्हारी एक लड़ाई हो जाए। हनुमान जी बोले "ठीक है परंतु फैसला कैसे होगा क्योंकि तुम भी बड़े बलवान और हम पर श्री राम जी की कृपा है। यह लड़ाई बहुत लंबी चलेगी"
रावण बोला "बड़ी लंबी लड़ाई नहीं केवल एक एक घूंसे की लड़ाई हो जाए। एक मुक्का में मारुंगा और एक मुक्का तुम मारोगें।"
हनुमान जी बोले "ठीक है, पहले तुम मारो।"
रावण बोला "पहले मैं क्यों? तुम क्यों नहीं?"
हनुमान जी बोले "कि यदि पहले मैंने मारा तो हो सकता है कि तुम्हें मारने का मौका ही ना मिले। इसलिए पहले तुम ही मुक्का मारो।"
रावण ने पूरी शक्ति से एक मुक्का मारा। हनुमान जी इस प्रहार से जमीन पर घुटने के बल वीरासन में बैठ गए, और वापस खड़े हो गए।
अब मुक्का मारने के हनुमानजी की बारी थी। जैसे उन्होंने मुक्का मारने के लिए अपना हाथ उठाया तभी देवलोक से देख रहे ब्रह्मा जी और शंकर जी ने हाथ जोड़कर कहा कि हे महाबली रुको नहीं तो रावण मर जाएगा और श्री राम का कार्य अधूरा रह जाएगा।
तब हनुमान जी ने सोचा कि रावण को थोड़ा मजा तो चखा देना चाहिए। उन्होंने रावण को थोड़ी ही शक्ति से एक घुसा मारा। इस प्रहार से रावण जमीन पर गिर गया और मूर्छित हो गया।
जब रावण को कुछ देर बाद होश आया तो उसने हनुमान जी की बल की तारीफ करी।
हनुमान जी बोले "यह तो मैंने धीरे से ही मारा था यदि जोर से मारता तो तुम उठी नहीं पाते।"
तो देखा आपने यह है हमारे हनुमान जी महाबली महाशक्तिशाली रुद्रावतार!!
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