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हनुमन्त त्रिकाल वंदनं ।। सियावर राम चन्द्र की जय, पवनपुत्र हनुमान की जय ।।
प्रातः स्मरामि हनुमन् अनन्तवीर्यं श्री रामचन्द्र चरणाम्बुज चंचरीकम् ।
लंकापुरीदहन नन्दितदेववृन्दं सर्वार्थसिद्धिसदनं प्रथितप्रभावम् ॥

माध्यम् नमामि वृजिनार्णव तारणैकाधारं शरण्य मुदितानुपम प्रभावम् ।
सीताधि सिंधु परिशोषण कर्म दक्षं वंदारु कल्पतरुं अव्ययं आञ्ज्नेयम् ॥

सायं भजामि शरणोप स्मृताखिलार्ति पुञ्ज प्रणाशन विधौ प्रथित प्रतापम् ।
अक्षांतकं सकल राक्षस वंश धूम केतुं प्रमोदित विदेह सुतं दयालुम् ॥
।। सियावर राम चन्द्र की जय, पवनपुत्र हनुमान की जय ।।
मंगल भवन अमंगलहारी द्रवउँ दशरथ अजर बिहारी ।
दीन दयाल बिरिदु संभारी। हरहु नाथ सम संकट भारी ।।
Hanumant Trikal vandanam ।। siyaver ram chandra ki jai, pawanputra hanuman ki jai ।।
Pratah Smarami Hanuman anantvirya shree ramchandra charanambuj chancharikam ।
Lankapurdahan nanditdevvrindam sarvarthsidhi sadanm prathitprabhavam ॥

Madhyam namami vrijinarnav taarnekadharam sharanm muditaanupam prabhavam ।
Sitadhi sindhu parishoshan karm dakshm vandaru kalptaru avyaym aanjneyam

Sayam bhajami sharanop smritakhilarti punj pranaashan vidho prathit pratapam ।
Akshaantkam sakal rakshas vansh dhum detu pramodit videh sutam dayalum ॥
।। siyaver ram chandra ki jai, pawanputra hanuman ki jai ।।