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हनुमत्पञ्रत्‍‌न स्तोत्रम् ।। सियावर राम चन्द्र की जय, पवनपुत्र हनुमान की जय ।।
वीताखिलविषयेच्छं जातानन्दाश्रुपुलकमत्यच्छम् ।
सीतापतिदूताद्यं वातात्मजमद्य भावये हृद्यम् ॥

तरुणारुणमुखकमलं करुणारसपूरपूरितापाङ्गम् ।
संजीवनमाशासे मञ्जुलमहिमानमञ्जनाभाग्यम् ॥

शम्बरवैरिशरातिगमम्बुजदलविपुललोचनोदारम् ।
कम्बुगलमनिलदिष्टं विम्बज्वलितोष्ठमेकमवलम्बे ॥

दूरीकृतसीतार्ति: प्रकटीकृतरामवैभवस्फूर्ति: ।
दारितदशमुखकीर्ति: पुरतो मम भातु हनुमतो मूर्ति: ॥

वानरनिकराध्यक्षं दानवकुलकुमुदरविकरसदृक्षम् ।
दीनजनावनदीक्षं पावनतप:पाकपुञ्जमद्राक्षम् ॥

एतत् पवनसुतस्य स्तोत्रं य: पठति पञ्चरत्‍‌नाख्यम् ।
चिरमिह निखिलान् भोगान् भुक्त्वा श्रीरामभक्तिभाग् भवति ॥
।। सियावर राम चन्द्र की जय, पवनपुत्र हनुमान की जय ।।
मंगल भवन अमंगलहारी द्रवउँ दशरथ अजर बिहारी ।
दीन दयाल बिरिदु संभारी। हरहु नाथ सम संकट भारी ।।
Hanuman Panchratanm Strotam ।। Siyaver Ramchandra ki jai, pawnaputra hanuman ki jai ।।
Vitakhilvishayechchham jatanandashrupulakamatyachchham ।
Sitapatidutadym vatatmajamdya bhavye hridayam ॥

Tarunarunmukh kamalam karunaras purpuritapangam ।
Sanjeevanmashase manjul mahima anjanabhagyam ॥

Shambervairishratigamambuj dal vipul lochnodaram ।
Kambugalamnildishtam vimbajvalitoshthmekamvalambe ॥

Durikrit sitartih prakatikrit ramvaibhav sfurtih ।
Daritdashmukhkirtih purto mm bhatu hanumto murtih ॥

Vanernikaradhyaksham danavkul kumuder vikersadakshm ।
Din janavandiksham pawantaph pakpunjmadraksham ॥

Atath pavansutsya strotram yh pathti panchratnakhyam ।
Chirmih nikhilan bhogan bhuktva shriram bhaktibhag bhavti ॥
।। Siyaver Ramchandra ki jai, pawnaputra hanuman ki jai ।। ।।