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श्री हनुमान जी

हिन्दू धार्मिक मान्यताओं में श्री हनुमान जी रुद्र अवतार माने जाते हैं और इनको बल, बुद्धि, विद्या, शौर्य और निर्भयता का प्रतीक तथा कलयुग का प्रधान देवता माना गया है।

"अतुलितबलधामम्" - तुलसीदासजी श्री हनुमान जी को मात्र बलवान कहकर ही संतुष्ट नहीं थे बल्कि वे उन्हें बलवान से भी बढकर कुछ और कहना चाहते थे। यही कारण है कि उन्हें बलवान न कहकर बलधाम अर्थात बल का भण्डार कहा। यह इसलिये कि श्री हनुमान जी स्वयं तो बलवान है ही दूसरों को बल प्रदान करने में समर्थ है अत: यह विशेषण सार्थक है।

आज की इस विषम परिस्थिति में मनुष्य के लिये विशेषतया युवको एवं बालकों के लिये भगवान श्री हनुमान जी की उपासना अत्यन्त आवश्यक है। भारत के भटकते हुए नवयुवकों को श्री हनुमान जी से बहुत बड़ी प्रेरणा प्राप्त हो सकती है। श्री हनुमान जी बुद्धि, बल, विद्या, शौर्य प्रदान करके भक्तो की रक्षा करते है। भूत,प्रेत,पिशाच यक्ष राक्षस आदि उनके नमोच्चारण मात्र से ही भाग जाते है और उनके स्मरण मात्र से अनेक रोगों का प्रशमन होता है। मानसिक दुर्बलताओं के संघर्ष में उनसे सहायता प्राप्त होती है।

शौर्य, दक्षता, बल, धैर्य, प्राज्ञता नीति पूर्वक कार्य करने क्षमता पराक्रम तथा प्रभाव इन सभी सद्गुणों ने श्री हनुमान जी के भीतर घर कर रखा है। सीता के अन्वेषण में तत्पर वानरी सेना समुद्र देखकर जब विकल हो रही थी तब महावीर श्री हनुमान जी उसे आश्रासन दिया तथा वे सौ योजन समुद्र को लाँघ गये। पुन:लंकापुरी की अधिष्ठात्री राक्षसी को परास्तकर उन्होंने रावण के अन्त:पुर को देखा व सीता का पता लगाया उनसे वार्तालाप करके उन्हें ढाढस बंधाया। पुन: वीर श्री हनुमान जी ने अकेले ही रावण के सेनापतियों, मन्त्री पुत्रों, किकरों का तथा रावण पुत्र अक्षकुमार का वध किया। ब्रहास्त्र के बन्ध से छुटकर उन्होंने रावण से वार्तालाप करते हुए उसे फटकारा तथा लंकापुरी जलाकर भस्म कर दिया। अकेले रावण जैसे विश्व-विजयी शत्रु के घर में घुसकर अपना ध्येय पूर्ण करने के बाद शत्रु समुदाय से घिरा होने पर भी निर्भीक रूप से ललकार कर अपने स्वामी की जय जयकार करते है। वीरता में श्री हनुमान जी की कोई तुलना नही की जा सकती।

श्री हनुमान श्रीराम भक्तो के परमाधार रक्षक और श्रीराम मिलन के अग्रदूत है। श्रीराम भक्तको श्री श्री हनुमान जी से सहज प्रेम आश्रय और सस्नेह रक्षा प्राप्त होती है। महावीर श्री हनुमान जी के वचन में ही नहीं किंतु उनके वास्तविक जीवन में भी कोई असम्भव तत्व नहीं था।

शास्त्रों के मुताबिक श्री हनुमान जी सर्वगुण, सिद्धि और बल-बुद्धि के अधिपति देवता हैं। इन को बल-बुद्धि व रिद्धि-सिद्धि का प्रतीक माना जाता है। यदि साधक सच्चे मन से श्री हनुमान जी की उपासना करे तो इस कलियुग में यह की गयी पूजा तुरंत फल देने वाली मानी गयी है।

भक्त शिरोमणि श्री श्री हनुमान जी के कार्यकलाप आचार विचार एवं व्यवहार आदि न केवल हिंदू-जाति के प्रत्युत मानव मात्र के लिये परम कल्याणकारी सीख है जिनके अध्ययन प्रत्येक व्यक्ति अपने लौकिक और पारलौकिक जीवन को सफल कर सकता है। इसीलिये मारुतनन्दन भारतवासियों के लिये ऐसे लोकप्रिय इष्टदेव है कि उनके अनुयायी भक्त एवं उनके मन्दिर प्राय:काश्मीर से कन्याकुमारी द्दारका से जगन्नाथपूरी तक भारत वर्ष के प्रति ग्राम और नगर में विधमान है। नेपाल, मलेशिया, इंडोनेशिया, जापान आदि विदेशो में भी श्री श्री हनुमान जी अत्यन्त लोकप्रिय है। इस प्रकार भारत में ही नही अपितु विदेशो में भी श्री हनुमान जी के मन्दिर है, उनकी मूर्तियाँ है, और उनके चरित्र भी दिखाए जाते है।

अत्यन्त बलशाली परम पराक्रमी जितेन्द्रिय ज्ञानियों में अग्रगण्य तथा भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त श्री श्री हनुमान जी का जीवन भारतीय जनता के लिये सदा से प्रेरणादायक रहा है। वे वीरता की साक्षात प्रतिमा एवं शक्ति तथा बल पराक्रमकी जीवन मूर्ति है।